TCS shareholders approve up to Rs 16,000 crore buyback plan | TCS शेयरधारकों ने दी Buyback प्लान को मंजूरी, 16,000 करोड़ रुपये का होगा बायबैक

नई दिल्ली: भारत की दिग्गज आईटी कंपनी (IT Company) टाटा टेली सर्विसेज (TCS) के शेयरधारकों (Shareholders) ने 16,000 करोड़ रुपये के बायबैक प्लान (Buyback plan) को मंजूरी दे दी है. TCS ने ये जानकारी दी है. पिछले महीने TCS के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 5,33,33,333 इक्विटी शेयर (Equity Shares) के बायबैक प्रस्ताव को 3000 रुपये प्रति शेयर के भाव पर मंजूरी दी थी. 

TCS के शेयर बायबैक को मंजूरी 

बायैबक को लेकर TCS में 20 अक्टूबर को वोटिंग शुरू हुई थीं जो इस 18 नवंबर तक चली. 99.57 परसेंट वोटिंग बायबैक ऑफर के पक्ष में ही पड़ा. प्रमोटर्स की ओर से बायबैक प्रस्ताव पर 100 परसेंट वोटिंग रही. पब्लिक इंस्टीट्यूशनल शेयरहोल्डर्स की वोटिंग परसेंट 98.11 रहा जबकि बाकी शेयरहोल्डर्स ने 98.43 परसेंट मत बायबैक के पक्ष में ही दिया. TCS की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक बायबैक के लिए 28 नवंबर को रिकॉर्ड डेट (record date) तय किया गया है. यानी 28 नवंबर को वो नाम तय होंगे जो इस बायबैक में हिस्सा लेने के योग्य हैं. 

TCS के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश गोपीनाथ ने पहले कहा था कि कंपनी अपने शेयरहोल्डर्स को उनका पैसा लौटाने की पॉलिसी पर फोकस करती है. TCS के पास सितंबर 2020 तक 58500 करोड़ रुपये का कैश रिजर्व है. पिछले साल TCS ने स्पेशल डिविडेंड दिया था और इस साल बायबैक कर रही है. 

पिछले साल अक्टूबर में TCS के बोर्ड ने 40 रुपये प्रति शेयर का स्पेशल डिविडेंड भी दिया था. जबकि 2018 में 16000 करोड़ रुपये का बायबैक किया था, 2017 में भी कंपनी ने शेयर बायबैक किया था. कंपनी का कहना है कि बायबैक ऑफर उसकी नीति का हिस्सा है जिसमें शेयरहोल्डर्स अतिरिक्त कैश लौटाया जाता है. TCS के अलावा दूसरी आईटी कंपनी विप्रो ने भी 400 रुपये प्रति शेयर के भाव पर 9500 करोड़ रुपये के बायबैक प्लान को मंजूरी दी है. 

क्या होता है शेयर बायबैक? 

जब किसी कंपनी का IPO में आता है तो निवेशक उसमें पैसा लगाकर शेयर खरीदते हैं, ये एक सामान्य प्रक्रिया है. लेकिन जब कंपनी अपने ही शेयर निवेशकों से वापस खरीदती है तो उसे share buyback कहते हैं. इसे एक तरह से IPO का उलट मान सकते हैं. 
शेयर बायबैक की प्रक्रिया लंबी होती है. कंपनी का बोर्ड शेयर बायबैक का प्रस्ताव पास करता है. इसमें रिकॉर्ड डेट तय होती है, जिसका मतलब होता है कि एक तय समय तक जिन निवेशकों के पास कंपनी के शेयर हैं वो चाहें तो अपने शेयर बायबैक के लिए दे सकते हैं. TCS के केस में 28 नवंबर बायबैक डेट है, यानि अगर आप TCS के शेयर रखते हैं तो बायबैक के लिए 28 नवंबर तक ऑफर कर सकते हैं.  

शेयर बायबैक करने की कई वजहें हैं. ज्यादातर कंपनियां शेयर बायबैक तभी करती हैं जब उनके पास नीचे दिए हुए कारण होते हैं  

कंपनियां शेयर बायबैक क्यों करती हैं?

1. जब किसी कंपनी के पास अतिरिक्त नकदी (Cash Reserve) हो जाती है तो वो उसका इस्तेमाल अपने शेयरों को खरीदने में इस्तेमाल करती है. 
2. बायबैक के जरिए प्रमोटर्स की कंपनी में हिस्सेदारी बढ़ जाती है, जिससे उसके टेकओवर होने का खतरा कम हो जाता है
3. EPS यानी एक शेयर से होने वाली कमाई को बढ़ाने की कोशिश की जाती है
4. कंपनियां ज्यादा भाव पर शेयर खरीद लेती हैं, जिससे मार्केट में शेयरों की संख्या कम हो जाती है और प्रमोटर की होल्डिंग बढ़ती है
5. कभी कभी कंपनियों को जब लगता है कि किसी शेयर का भाव अंडर वैल्यू है, यानी जितना होना चाहिए उतना नहीं है तो बायबैक के जरिए वो उसका शेयर भाव बढ़ाने की कोशिश करती हैं
6. शेयरहोल्डर्स के लिए भी बायबैक फायदेमंद होता है, क्योंकि उन्हें बाजार भाव से ज्यादा पर शेयर के दाम मिलते हैं. 

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