पुरुषों के लिए अधिक खतरनाक है कोरोना, फिर भी डर रही हैं महिलाएं, जानें क्यों

कोरोना वायरस पर अधिक चिंता जताना महिलाओं को जोखिम में डाल सकता है.

कोरोना वायरस पर अधिक चिंता जताना महिलाओं को जोखिम में डाल सकता है.

कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी के परिणामों को लेकर पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ज्यादा चिंता सता रही है.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 12, 2020, 2:31 PM IST

कोरोना वायरस (Coronavirus) पर कई हालिया वैश्विक रिपोर्ट (World Report) के मुताबिक पुरुषों की तुलना में महिलाओं पर वायरस का असर कम बताया गया है. बावजूद इसके महिलाओं में कोरोना वायरस को लेकर चिंता बढ़ रही है. अमेरिका के डार्टमाउथ कॉलेज (Dartmouth College) की एक रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं का वायरस पर इस तरह चिंता करना बड़े-बड़े वर्किंग सेक्टर में उनकी भूमिकाओं पर सवाल खड़ा कर सकता है. अगस्त महीने के अंत में, फ्रांस और ब्रिटेन में यूगोव के सर्वेक्षण (Yougov Survey) के अनुसार, 50 फीसदी पुरुष तो वहीं 64 फीसदी महिलाएं कोरोना वायरस के फैलने से चिंता में हैं. कनाडा में मार्च में 49 फीसदी महिलाओं ने वायरस को लेकर चिंता जताई थी. वहीं, पुरुषों में यह आंकड़ा 30 फीसदी का है.

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अमेरिका की ‘राजनीति और लिंग’ पत्रिका में छपे डार्टमाउथ कॉलेज (Dartmouth College) के एक अध्ययन के मुताबिक, कोरोना वायरस महामारी के परिणामों को लेकर पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ज्यादा चिंता सता रही है. जून में सर्वे के दौरान पता चला था कि 24 फीसदी महिलाओं की तुलना में 37 फीसदी पुरुष वायरस के जल्द खत्म होने की इच्छा जता रहे थे जबकि कई अध्ययनों में कोरोना वायरस को महिलाओं की तुलना में पुरुषों के लिए अधिक खतरनाक बताया गया है.

अमेरिकी अध्ययन के मुताबिक, कार्यस्थलों पर कोविड-19 के प्रति महिलाओं के व्यवहार और दृष्टिकोण को देखते हुए उन्हें अनदेखा भी किया जा सकता है. हालांकि हेल्थकेयर और शिक्षा जैसे सेक्टर में महिलाएं उच्च पदों पर आसीन हैं. ऐसे में वायरस पर अधिक चिंता जताना उन्हें जोखिम में डाल सकता है. अध्ययन के अनुसार, मेडिकल और हेल्थकेयर में 3 फीसदी महिलाएं सीईओ के पद पर हैं. वहीं, हेल्थकेयर में 80 फीसदी महिला स्टाफ है.ये भी पढ़ें – बच्चों के दांत से काटने की आदत होगी दूर, फॉलो करें ये टिप्‍स

फ्रांस के सीएसए (CSA) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश की मीडिया इंडस्ट्री में मार्च से मई तक कोरोना वायरस पर विचार रखने के 41 फीसदी गेस्ट को बुलाया गया था, जिसमें कई महिला गेस्ट भी शामिल थीं, इनमें 55 फीसदी से भी ज्यादा माएं, देखभाल करने वाली महिला स्टाफ आदि शामिल थीं और इसमें 21 फीसदी हेल्थकेयर महिला विशेषज्ञ शामिल थीं. बावजूद इसके वायरस का डर महिलाओं में लगातार घर कर रहा है.

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