Comparison Between India gdp Growth and Bangladesh gdp in Hindi

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष International Monetary Fund (आईएमएफ) ने बुधवार को वैश्विक अर्थव्यवस्था (World Economic Outlook) के आंकड़े जारी किए. आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक 2020 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद gross domestic product (GDP) में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आएगी. जबकि कुछ माह पहले आईएमएफ ने भारत की जीडीपी में 4.5 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगाया था, इस लिहाज से अब ताजा अनुमान दोगुनी जीडीपी की गिरावट का है.

लेकिन इस बात से भी अधिक जिस बात ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा है वह है बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति जीडीपी (Bangladeshi GDP) का आंकड़ा. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुमान के मुताबिक 2020 में एक औसत बांग्लादेशी नागरिक की प्रति व्यक्ति आय एक औसत भारतीय नागरिक की प्रति व्यक्ति आय से अधिक होगी. सवाल उठता है कि यह कैसे संभव है? क्या वाकई भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक नहीं है?

कुल जनसंख्या बड़ा कारण
आमतौर पर, देशों की तुलना जीडीपी विकास दर या पूर्ण जीडीपी के आधार पर की जाती है. आजादी के बाद के अधिकांश बार इन दोनों गणनाओं पर भारत की अर्थव्यवस्था बांग्लादेश से बेहतर ही रही है. यह चार्ट 1 और 2 से देखा जा सकता है कि भारत की अर्थव्यवस्था बांग्लादेश से 10 गुना अधिक है और हर साल तेजी से बढ़ी है. हालांकि, प्रति व्यक्ति आय में एक और कारक शामिल है. कुल जनसंख्या. कुल जनसंख्या द्वारा कुल जीडीपी को विभाजित करके जीडीपी निकाली जाती है. परिणामस्वरूप, इस वर्ष भारत की प्रति व्यक्ति आय बांग्लादेश से नीचे आने के तीन कारण हैं.

पहली बात यह ध्यान देने वाली है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में 2004 के बाद से तेजी से जीडीपी की वृद्धि दर देखी जा रही है. हालांकि, इस गति ने 2004 और 2016 के बीच दो अर्थव्यवस्थाओं के सापेक्ष बड़ा बदलाव नहीं किया क्योंकि भारत बांग्लादेश की तुलना में और भी तेजी से बढ़ा. 2017 के बाद से चार्ट 1 के रूप में भारत की विकास दर में तेजी से गिरावट आई है जबकि बांग्लादेश इसल मामले में और भी तेज हो गया.

जनसंख्या वृद्धि की दर
दूसरा सबसे बड़ा कारण जनसंख्या वृद्धि दर है. 15 साल की अवधि में भारत की जनसंख्या 21 प्रतिशत तेजी से बढ़ी है. इन दोनों कारकों के संयुक्त प्रभाव से समझा जा सकता है कि प्रति व्यक्ति जीडीपी का अंतर कोविड- 19 से पहले ही काफी हद तक तय था. 2007 में बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति जीडीपी भारत के मुकाबले आधी थी. यह 2014 में भारत की लगभग 70 प्रतिशत थी और यह अंतर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से खत्म होता गया.

पहले कभी ऐसा हुआ है?
सबसे तात्कालिक कारक 2020 में अर्थव्यवस्था पर कोविड -19 का सापेक्ष प्रभाव रहा. भारत की जीडीपी में 10 प्रतिशत की कमी आई है जबकि बांग्लादेश की लगभग 4 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है दूसरे शब्दों में कहें तो इसका मतलब यह है कि भारत सबसे खराब अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और बांग्लादेश बेहतर में से एक. लेकिन सवाल उठता है कि क्या पहले कभी ऐसा हुआ है? हां, 1991 में जब भारत एक गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा था तब केवल 1 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति जीडीपी भारत से आगे बढ़ गई फिर भी भारत ने दोबारा बढ़त बनाई.

भारत को फिर से बढ़त हासिल करने की उम्मीद?

सवाल यह भी है कि क्या भारत को फिर से बढ़त हासिल करने की उम्मीद है? जवाब है, हां. आईएमएफ के अनुमानों से ही पता चलता है कि भारत में अगले साल प्रति व्यक्ति जीडीपी तेजी से बढ़ने की संभावना है. बांग्लादेश की कम जनसंख्या वृद्धि और तेज आर्थिक विकास को देखते हुए भारत और बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति आय के मामले में फाइट टाइट होने की संभावना है.

ये है मजबूती
सवाल उठता है कि बांग्लादेश इतनी तेजी से और इतनी मजबूती से कैसे विकसित हुआ? पाकिस्तान से अपनी स्वतंत्रता के प्रारंभिक वर्षों में बांग्लादेश ने तेजी से बढ़ने के लिए संघर्ष किया. पाकिस्तान से अलग होने से बांग्लादेश को अपनी आर्थिक और राजनीतिक पहचान को लेकर नए सिरे से शुरुआत करने का मौका मिला. जैसे, इसके श्रम कानून कड़े हुए और इसकी अर्थव्यवस्था में तेजी से महिलाओं को शामिल किया गया. यहां के विकास का एक प्रमुख आधार कपड़ा उद्योग है, बांग्लादेश में कपड़ों की सिलाई का काम व्यापक पैमाने पर होता है और इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं. बांग्लादेश में 2013 के बाद से ऑटोमेटेड मशीनों का इस्तेमाल हो रहा है. बांग्लादेश की महिलाओं ने कपड़ा निर्यात के व्यापार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात के मामले में बड़े स्तर पर पहुंचा दिया.

उसकी अर्थव्यवस्था में सकल घरेलू उत्पाद बड़ा कारक है. बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की संरचना ऐसी है कि इसका सकल घरेलू उत्पाद औद्योगिक क्षेत्र में अग्रणी है, इसके बाद सर्विस सेक्टर है. ये दोनों क्षेत्र बहुत सारे रोजगार पैदा करते हैं और कृषि की तुलना में अधिक पारिश्रमिक है. दूसरी ओर, भारत ने अपने औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए संघर्ष किया है और अभी भी बहुत से लोग कृषि पर ही निर्भर हैं.

अर्थशास्त्र से परे, बांग्लादेश की उत्तरोत्तर तेज विकास दर के कुछ और प्रमुख कारण हैं. जिनमें पिछले दो दशकों में स्वच्छता, वित्तीय समावेशन और महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में सुधार शामिल हैं. उदाहरण के लिए, इसकी आबादी के कम अनुपात के बावजूद बांग्लादेश में दूषित जल और गंदगी से होने वाली मृत्यु दर भारत (चार्ट 5) की तुलना में बहुत कम है. इससे इतर विश्व बैंक के ग्लोबल फाइनेक्स डेटाबेस के अनुसार, बांग्लादेश की आबादी के एक छोटे से हिस्से के ही बैंक खाते हैं लेकिन भारत की तुलना में निष्क्रिय बैंक खातों का अनुपात काफी कम है. नवीनतम लिंग समानता रैंकिंग में बांग्लादेश भारत से बहुत आगे है.

बांग्लादेश के सामने चुनौतियां
पिछले 15 वर्षों में बांग्लादेश में बहुत बड़ा बदलाव देखा गया है. इसने पाकिस्तान को बहुत पीछे छोड़ दिया है और खुद को लोकतांत्रिक देश के तौर स्थापित करने में कामयाब रहा है. लेकिन इसकी प्रगति के बावजूद चुनौतिया हैं. उदाहरण के लिए, गरीबी का स्तर अभी भी भारत के (चार्ट 4) की तुलना में बहुत अधिक है. विश्व बैंक के अनुसार, गैर-कृषि क्षेत्र में दैनिक और स्व-नियोजित श्रमिकों, विनिर्माण क्षेत्र में वेतनभोगी श्रमिक गरीबी की चपेट में हैं. इसके अलावा बुनियादी शिक्षा मापदंडों के लिहाज से भारत से काफी पीछे है. बांग्लादेश की सबसे बड़ी चिंता आर्थिक मोर्चे पर नहीं है, काम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण स्वास्थ्य समस्या यहां की बड़ी चुनौती है.

प्रमुख राजनीतिक दल नियमित रूप से एक दूसरे का हिंसक उत्पीड़न करते रहते हैं. रोजमर्रा के सार्वजनिक जीवन में बेहद भ्रष्टाचार है. इस मामले में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रैंकिंग के 2019 संस्करण में, बांग्लादेश 198 देशों में से 146 रैंक पर है. यहां कट्टरपंथी इस्लाम में भारी वृद्धि हो रही है. परिणामस्वरूप कई ब्लॉगर्स को मार दिया गया है.

VIDEO



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *